किडनी स्टोन – पथरी के उपाय और घरेलू नुस्खे

घर के बड़े बुजुर्गों के पास अक्सर हर दर्द और मर्ज का इलाज होता है। आपने भी अपने घर में बड़े बुजुर्गों जैसे कि दादा-दादी या नाना-नानी को कहते सुना होगा कि सुबह खाली पेट 3-4 ग्लास पानी पीने से पेट की सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं। ऐसे ही न जाने कितने घरेलू नुस्खे हमें दादी और अन्य लोगों से सुनने को मिले हैं। आज हम आपको पेट और किडनी में पथरी के इलाज के लिए दादी मां के कुछ नुस्खे यानी ऐसे नुस्खे बताएंगे जिन्हें आप घर पर आजमा सकते हैं:

1- अगर आपके पेट में पथरी है तो इसके लिए पत्थरचट्टा के पौधे का एक पत्ता लें और उसे मिश्री के कुछ दानों के साथ पीसकर खा लें। पत्थरचट्टा औषधीय गुणों वाला एक पौधा होता है, जिसका उपयोग किडनी और पेट से जुड़ी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। यह सदाबहार पौधा है जो भारत में खूब होता है। किडनी में पथरी की समस्या के लिए भी पत्थरचट्टा को सबसे ज्यादा कारगर माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रोस्टेट ग्लैंड और किडनी स्टोन की समस्या से निजात दिलाने में काफी मदद करता है।

2- एक ग्लास पानी में 3-4 बड़ी इलायची के एक चम्मच दाने, 1 चम्मच मिश्री और थोड़े से खरबूजे के बीज की गिरी भिगो दें और रोजाना सुबह इस पानी को पिएं और इन सभी चीजों को भी खा लें। कुछ दिनों में ही पथरी निकल जाएगी।

3- आंवला भी पथरी को निकालने में मदद करता है। इसके लिए रोजाना सुबह एक-एक चम्मच आंवले का पाउडर खाएं। आंवले के अलावा पथरी के इलाज में जामुन को भी कारगर बताया गया है।

4- पथरी निकालने के लिए पपीते की जड़ भी काफी मदद करती है। इसके लिए 7-8 ग्राम पपीते की जड़ को 1 ग्लास पानी में अच्छी तरह से घोल लें और फिर छान लें। अब रोजाना इस पानी को पिएं। ऐसा करने पथरी गल जाएगी और कुछ ही दिनों में निकल जाएगी।

5- पथरी पेट में हो या फिर किडनी में, लेकिन एक बात का ध्यान जरूर रखें कि आप ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। ज्यादा पानी पीने से शरीर में मौजूद पूरी गंदगी बाहर निकल जाएगी और पथरी होने का भी डर नहीं रहेगा। दरअसल किडनी शरीर में एक फिल्टर का काम करती है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो किडनी पानी की कम मात्रा छानती है। इसकी वजह से शरीर में मौजूद कैल्शियम, यूरिक ऐसिड जैसी कई अन्य चीजें शरीर से बाहर नहीं निकल पाते और वे पथरी के रूप ले लेते हैं।

दुनिया में लाखों ऐसे मरीज है जो गुर्दे की पथरी से परेशान है। गॉल ब्लाडर में पथरी बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। इसे पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी। दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी। जिसमें से लगभग अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती है।

यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में कम होती है। पित्त की पथरी को घरेलू उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। इस लेख को पढ़ें और अधिक जानकारी प्राप्त करें।

पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लेडर में होता है। यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा  ज्यादा हो जाती है, तो पथरी निर्माण के लिये आदर्श स्थिति बन जाती है। यह बीमारी आमतौर पर तीस से साठ वर्ष के उम्र के लोगों में पाई जाती है और स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषों में चार गुना अधिक पाई जाती है।

बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दो और मूत्रवाहक नली में पथरी बनती है। पथरी के जिन मरीजों को डायबिटीज की बीमारी होती है उनको गुर्दे की बीमारी होने की काफी संभावनाएं रहती हैं। अगर किसी मरीज को रक्तचाप की बीमारी है तो उसे नियमित दवा से रक्त चाप को नियंत्रण करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर रक्तचाप बढ़ता है, तो इस बिमारी से भी गुर्दे खराब हो सकते हैं।

प्रेग्नेन्सी, मोटापा, मधुमेह, अधिक बैठे रेहने बले लोगों, तेल घी अधिकता वाले भोजन और शरीर में खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस  समस्या को कुछ घरेलू उपचारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

गाजर और ककडी का रस को सौ मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
सुबह खाली पेट पचास मिली लीटर नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।
शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शकर युक्त पेय हानिकारक हैं। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।

नाशपती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्वों से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।

विटामिन सी अर्थात एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रोल 
कम मात्रा में होता है और यह प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।

तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।

खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन सी गॉलब्‍लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है। 

रोजाना एक चम्‍मच हल्‍दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है।
 
पथरी के लिए रामबाण दवा है कुलथी

पथरी के इलाज के लिए कुलथी
कुलथी की दाल को पथरीनाशक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार कुलथी की दाल में विटामिन 'ए' पाया जाता है, यह शरीर में विटामिन 'ए' की पूर्ति कर पथरी को रोकने में मदद करता है। यह दाल उड़द के समान और लाल रंग की होती है। इसकी दाल बनाकर रोगी को दी जाती है जिससे पथरी निकल जाती है। यह आपको बाजार में पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल सकती है।

कुलथी की दाल के सेवन से पथरी टूटकर या धुलकर छोटी हो जाती है, जिससे पथरी सरलता से मूत्राशय में जाकर यूरिन के रास्ते से बाहर आ जाती है। मूत्रवर्धक गुण होने के कारण इसके सेवन से यूरिन की मात्रा और गति बढ़ जाती है, जिससे रुके हुए पथरी के कण पर दबाव ज्यादा पड़ता है और दबाव ज्‍यादा पड़ने के कारण वह नीचे की तरफ खिसक कर बाहर आ जाती है।

कैसे करें कुथली का इस्तेमाल
कुथली की दाल को 250 ग्राम मात्रा में लें और इसे अच्छे से साफ कर लें। और रात को 3 लीटर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह होते ही इस भीगी हुई दाल को पानी सहित हल्की आंच में 4 घंटे तक पकाएं। और जब पानी 1 लीटर रह जाए तब उसमें देशी घी का छौंक लगा दें। आप उसमें काली मिर्च, सेंधा नमक, जीरा और हल्दी डाल सकते हैं। यह 1 सेंटीमीटर से छोटी पथरी के लिए सफल औषधि है। 

कुथली का पानी बनाने का तरीका
250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुथली की दाल को डालें। और रात में ढक कर रख लें। सुबह इस पानी को अच्छे से मिलाकर खाली पेट पी लें। जिस इंसान को पथरी एक बार हो जाती है, उसे दोबारा होने का खतरा होता है। इसलिए पथरी निकलने के बाद भी रोगी को कुथली का कभी-कभी सेवन करते रहना चाहिए। पथरी में कुलथी औषधि के समान है।

पथरी होने पर क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज  
पथरी में कुलथी के अलावा आप खरबूजे के बीज, मूली, आंवला, जौ, मूंग की दाल और चोलाई की सब्जी भी खा सकते हैं। साथ ही रोज 7 से 8 गिलास सादा पानी पिएं। पथरी के रोगी को उड़द की दाल, मेवे, चॉकलेट, मांसाहार, चाय, बैंगन, टमाटर और चावल नहीं खाने चाहिए।

लेमन जूस और ऑलिव ऑयल
लेमन जूस और ऑलिव ऑयल को मिलाकर उसका सेवन गॉलब्लेडर के स्टोन के लिए किया जाता रहा है लेकिन किडनी के स्टोन में भी ये काफी कारगर है। नींबू के रस में मौजूद सिट्रिक एसिड कैल्शियम बेस वाले स्टोन को तोड़ने का काम करता है और दोबारा बनने से भी रोकता है। इस मिश्रण को बनाने के लिए नींबू के रस और ऑलिव ऑयल को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें और दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें।

अनार का जूस
अनार का जूस और उसके बीज दोनों में ही एस्ट्रीजेंट गुण होता है जो कि किडनी के स्टोन के इलाज में मददगार है। यदि आपकी किडनी में है तो प्रतिदिन एक अनार खाना या फिर उसका जूस पीना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा अनार को फ्रूट-सलाद में भी मिलाकर खाया जा सकता है।

व्हीट ग्रास
व्हीट ग्रास को पानी में उबालकर ठंडा कर लें। इसके नियमित सेवन से किडनी के स्टोन और किडनी से जुड़ी दूसरी बीमारियों में काफी आराम मिलता है। इसमे कुछ मात्रा में नींबू का रस मिलाकर पीना और बहतर हो सकता है।

पार्सले वाटर
इसे बनाते समय खीरे और नींबू का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। पार्सले कैल्शियम ऑक्सलेट को एकत्रित होने से रोकता है जिससे पथरी आसानी से बाहर निकल जाती है। इसे बनाने के लिए पार्सले की पत्तियां, 1 नींबू और आधा खीरा लें। पार्सले की पत्तियों को 15 मिनट तक पानी में उबाल लें। उसे ठंडा होने के बाद उसमें छीलकर काटा हुआ खीरा और नींबू का रस मिलाएं। अब इसे ठंडा होने के लिए रख दें। ठंडा होने के बाद इसे छानकर पी लें।

पार्सले और सेब का सिरका
सेब का सिरका हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्पादन करने में मदद करता है जो किडनी में पथरी होने से रोकथाम करता है। इसके साथ ही ऑलिव ऑयल ल्यूबरिकेंट की तरह काम करता है पथरी को बाहर निकालने में मदद करता है। इसे बनाने के लिए पार्सले, 1 कप पानी, 1 चम्मच सेब का सिरका और कुछ बूंदे ऑलिव ऑयल लें। इसे बनाने के लिए सभी चीजों को मिलाकर ब्लैंड कर लें। अब इसे छानकर पी लें। अगर यह ज्यादा गाढ़ा है तो इसमें पानी मिला सकते हैं।


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