जोड़ों के दर्द का इलाज

जब जोड़ों मे तकलीफ या दर्द होता है, तो उससे जोड़ों का दर्द (जॉइंट पैन) कहा जाता है। जोड़ों में दर्द के कई कारण हो सकते है. जैसे कि चोट लगना, संक्रमण (इन्फेक्शन) के कारण, आर्थराइटिस (हड्डीयों की कमजोरी) के कारण या फिर बहुत काम मामलों मे जॉइंट कैंसर (जोड़ों मे कैंसर) के कारण हो सकता है। ज्यादातर घुटने, टखने, एल्बो और कंधों मे जोड़ो का दर्द हो सकता है। कभी-कभी, यह दर्द कुछ यौन संचरित रोगों (एसटीडी) के कारण भी हो सकता है, जैसे क्लैमाडिया (आंखों मे सूजन) और गोनोरिया (सूजाक)। अतिरिक्त भौतिक गतिविधि (शारीरिक परिश्रम) या अत्यधिक व्यायाम करने से भी जोड़ो मे दर्द हो सकता है। जोड़ों के दर्द के साथ साथ इसके लक्षणों (सूजन, लंगड़ा, जोड़ो मे लाल हो जाना) को भी नियंत्रित किया जा सकता है। जोड़ो का दर्द कितना कम या ज़्यादा है या फिर जोड़ो दर्द की समस्या कितनी गंभीर है उस अनुसार इलाज किया जाता है। इसका इलाज के कई तरीके है। अगर कोई चोट लगने के कारण जोड़ो मे दर्द है तो चोट ठीक (दवाई और मलम-पट्टी के सहारे) होने पर जोड़ो का तकलीफ भी दूर हो जाएगी। 

उसी प्रकार, अगर जोड़ो मे दर्द आर्थराइटिस (जोड़ों की सूचन) क लिए हो रहा हे तो दवाई (दवाई जो हड्डीयों मे सूजन को ठीक करे और एंटीबायोटिक दवाओं) और उपचार के मदत से उसका इलाज किया जाता है। अंत में, अगर आपके जोड़ों में दर्द संक्रमण या एसटीडी के कारण होता है, तो दर्द का इलाज करना अनिवार्य रूप से सबसे पहले अंतर्निहित समस्या कासमाधान करना है। इसमें एंटीबायोटिक दवाओं शामिल होती है जो आपके संक्रमण को ठीक करने के लिए विशिष्ट होती है।

इलाज कैसे किया जाता है?
जोड़ों के दर्द का इलाज काफी हद तक दर्द के कारण पर निर्भर करता है। यही कारण है कि आपका डॉक्टर पहले उन जोड़ों की जांच करेगा जहां आपको चोट लगी हुई हैं। साथ ही आपको अपने दर्द, आहार, हालिया शारीरिक गतिविधि के बारे में बहुत सारे प्रश्न पूछ सकता हैं और क्या आप वर्तमान में कोई दवा ले रहे हैं (यदि यह किसी चीज का दुष्प्रभाव है)। अक्सर, निदान के मार्ग में यह निर्धारित करने के लिए एक्स-रे लेना शामिल है जिससे पता लग सके कि क्षेत्र में मामूली फ्रैक्चर या स्प्रेन है या फिर कोई अन्य समस्या है। एक बार दर्द का कारण निर्धारित हो जाने पर, डॉक्टर आपके लिए उपचार के सही तरीके का निर्धारण करता हैं। यदि इस संदर्भ में आपको जो दवाएं लेनी पड़ सकती हैं, वह बहुत सारी हो सकती है। यदि आप गठिया से पीड़ित हैं, तो आपको दवाएं दी जाएंगी जो प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने के लिए जानी जाती हैं। 

यह जोड़ों में सूजन से छुटकारा पाने में मदद कर सकती है और पूरे जोड़ के दर्द को प्रबंधित करने में आपकी सहायता कर सकता है। आपको कुछ विरोधी भड़काऊ दवाएं भी दी जाएंगी। इसके अलावा, आपको कोर्टिसोन इंजेक्शन भी दिए जा सकते हैं। डॉक्टरों के लिए पेन किलर दवाएं लिखना भी आम बात है, खासकर अगर दर्द इतना गंभीर है कि यह आपके दैनिक जीवन में परेशानी ला रहा है। यदि जोड़ों का दर्द गठिया के कारण होता है, तो आपको गठिया की दवाएं दी जाएंगी। संक्रमण के कारण होने वाले जोड़ों का दर्द को एंटीबायोटिक्स की मदद से इलाज किया जाता है। आपका डॉक्टर आपको सटीक खुराक बता सकता है जो दवा के लिए समय अवधि के साथ आवश्यक है।

सर्दियां आते ही बुजुर्गों के ही नहीं, काफी संख्या में युवाओं के जोड़ों में भी दर्द होने लगता है। इस मौसम में तापमान में गिरावट के साथ दर्द कई गुना बढ़ जाता है। प्रकाश हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट डॉ. वी. एस. चौहान कहते हैं कि आजकल ज्यादातर लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत है। हड्डियों के जोड़ों की संरचना बेहद जटिल होती है। इसके कार्टिलेज दोनों सिरों के बीच कुशन का काम करते हैं, लिगामेंट जोड़ों को एक दूसरे से बांध कर रखते हैं और मांसपेशियां इस संरचना को सहारा देती हैं। उम्र बढ़ने और सर्दियां आने पर दिक्कत और बढ़ती है। ऐसे में इन दिनों जोड़ों का ज्यादा ध्यान रखना जरूरी होता है।  

क्या है जोड़ों का दर्द
काफी समय बैठे रहने से, सफर करने से या उम्र बढ़ने से हमारी हड्डियां अकड़ जाती हैं या दर्द करने लगती हंै। इसे हम जोड़ों का दर्द या ज्वाइंट पेन कहते हैं। शरीर के ऐसे हिस्से, जहां दो हड्डियां मिलती हों, जोड़ कहलाते हैं। यह दर्द घुटने, कंधे, कोहनी,  गर्दन, बाजू और कूल्हे में हो सकता है। जोड़ों में दर्द की कई और वजहें हैं। लिगामेंट, कार्टिलेज या टेंडोंस में से किसी भी संरचना में चोट के कारण भी दर्द हो सकता है।

इस दर्द के कारण
जोड़ों की समस्या शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होती है। भोजन में कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं, जो इस एसिड को बढ़ाने का काम करते हैं। इससे एक तरफ जहां गुर्दा प्रभावित होता है, वहीं दूसरी तरफ जोड़ों की समस्या शुरू हो जाती है। यूरिक एसिड शरीर के जोड़ों में जाकर वहां छोटे-छोटे क्रिस्टल का रूप लेता है। इसके बाद सूजन, दर्द और ऐंठन की समस्या शुरू हो जाती है। उम्र बढ़ने के साथ हमारी हड्डियां भुरभुरी व खोखली होती जाती हैं। उम्र के बढ़ने के साथ-साथ ज्वाइंट पेन की समस्या गहराने लगती है। 40 वर्ष की उम्र के बाद यदि किसी को बीपी, हृदय रोग, शुगर है या ्त्रिरयों को रजोनिवृत्ति मिल चुकी है तो उनकी यह परेशानी उम्र के साथ बढ़ सकती है। इसके अलावा हड्डियों में मिनरल यानी खनिज की कमी होना, आथ्र्राइटिस, कार्टिलेज का घिस जाना भी कारण हो सकता है।

कैसे हो पहचान
अगर आपके जोड़ों में यह दर्द सूजन, लालिमा और कोमलता के साथ होता है या तीन दिनों से अधिक समय तक रहता है तो आपको अपने डॉक्टर से भी परामर्श लेना चाहिए। 

सर्दियों की बड़ी समस्या
डॉ. वी. के. चौहान के मुताबिक, बदलता मौसम, हवा में हल्की ठंडक, सुबह में थोड़ी-सी ठिठुरन आदि जोड़ों के दर्द के लिए पहले ही आगाह कर देते हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर जोड़ों के आसपास की नसों में सूजन हो जाती है, जिससे दर्द बढ़ता है। आथ्र्राइटिस के मरीजों के लिए भी यह मौसम बुरी खबर लाता है।

बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित
उम्र के साथ हड्डियों की समस्या बढ़ती जाती है। इस कारण बुजुर्गों में यह समस्या अधिक गंभीर होती है। दिन-रात दवा खाने से भी उन्हें कोई आराम नहीं मिलता। कभी-कभी उन्हें इतना ज्यादा दर्द होता है कि वे ठीक से सो भी नहीं पाते। उनके घुटनों में सूजन तक आ जाती है।

कैसे हो बचाव
उम्र के बढ़ने के साथ हड्डियों में कमजोरी आ जाती है, इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि कुछ ऐसा किया जाए, जिससे हड्डियां भी मजबूत हो जाएं और मांशपेशियां भी शिथिल न हों। इसके लिए पौष्टिक खानपान जरूरी है। उसमें खनिज तत्व कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। दूसरी जरूरत विटामिन डी की है, जिसकी प्राप्ति के लिए धूप का सेवन जरूरी है। इसके अलावा व्यायाम भी जरूरी होता है।

योग और व्यायाम
योगाचार्य दीपक कुमार झा कहते हैं कि योग और व्यायाम से रक्त संचार बढ़ता है और गर्म खून शरीर के हर हिस्से तक पहुंचता है, जिनमें शरीर के जोड़ भी शामिल हैं। स्वस्थ रक्त संचार आपके जोड़ों को लचीला और गर्म रखेगा, ताकि आपको दर्द महसूस न हो। ठंड में भी नियमित योग के साथ जॉगिंग और मॉर्निंग, ईवनिंग वॉक करना चाहिए।

बदलें खानपान
कोई भी मौसम हो, संतुलित आहार की जरूरत हमेशा होती है। संतुलित आहार में फल, सब्जियां, दालें, अनाज और डेयरी उत्पाद शामिल होने चाहिए। ठंड के दिनों में सभी मौसमी फल व सब्जियां अपने खाने में शामिल करें, ताकि आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन और खनिज मिलता रहे। भोजन के साथ अंकुरित मेथी का सेवन करें। कच्ची भिंडी सवेरे पानी के साथ खाएं। दिन भर में तीन अखरोट अवश्य खाएं।

मालिश और हीट थेरेपी
वैदिक ग्राम नोएडा के आयुर्वेदाचार्य डॉ. राघवन कहते हैं, कई रिसर्च में पाया गया है कि नियमित मालिश करने से ज्वाइंट पेन को आराम मिलता है। अगर आप ज्वाइंट पेन से परेशान हैं तो प्रभावित क्षेत्र में मालिश करने के लिए नारियल, जैतून, सरसों, अरंडी या लहसुन के तेल का इस्तेमाल करें, जिसे हल्का गर्म करके कोमल दबाव डालते हुए हाथ से कुछ समय के लिए मालिश करें। जोड़ों के दर्द में राहत पाने के लिए हीट थेरेपी भी बहुत लाभदायक साबित होती है।

खूब पिएं पानी
अकसर हम जोड़ों की सेहत के मामले में पानी के महत्व को नजरअंदाज करते हैं। जोड़ों के बीच के कार्टिलेज, जो हड्डियों के सिरों को घिसने से बचाते हैं, सेमी सॉफ्ट टिश्यू होते हैं, जिन्हें मुलायम रखना जरूरी होता है। इसके लिए पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। इसलिए ठंड के दिनों में भी पानी पीना कम न करें। एक बार में अधिक पानी बिल्कुल न पिएं।

इन बातों को रखें याद
जोड़ों के दर्द से बचने के लिए खान-पान का खास ख्याल रखें।
विटामिन बी जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है।
विटामिन बी3, नाइसिन युक्त पदार्थ जैसे मीट, मछली, चीज खाएं।
विटामिन बी5, पेंटोथेनिक एसिड युक्त पदार्थ जैसे मीट, अंडे, सोयाबीन, दलिया, साबुत अनाज, दाल व मूंगफली को अपने खाने में नियमित रूप से शामिल करें।
विटामिन बी6 जैसे साबुत अनाज, केला, सोयाबीन, दलिया, मीट, मछली आदि खाने से भी जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
जोड़ों में दर्द का बने रहना।
अकसर सुबह के समय जोड़ों में अकड़न।
जोड़ का सीमित उपयोग ही हो पाना या तेज दर्द करना।
जोड़ों के आसपास गर्माहट महसूस होना।
जोड़ों के आसपास की त्वचा पर लालीपन होना।
चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने, यहां तक कि आराम करते समय भी दर्द रहना।
चलने पर या गति करते समय जोड़ों का लॉक हो जाना और फिर दर्द होना।
जोड़ों का कड़ापन, खासकर सुबह में या यह पूरे दिन रह सकता है।

फिजियोथेरेपी से भी मिलता है आराम
फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों और पैरों की नसों को मजबूत एवं जोड़ों को लचीला बनाने में मदद मिलती है। ठंड में जोड़ों में अकड़न बढ़ जाती है। ऐसे में यह गर्माहट गतिशीलता और दर्द से राहत बढ़ाने में मददगार होती है। अपने जोड़ों को उनके हाल पर न छोड़ें। किसी अच्छे अस्थिरोग विशेषज्ञ से मिलें। जरूरी हो तो जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी भी कराई जा सकती है।

बिना दवाइयों के कैसे करें दूर जोड़ो का दर्द

जोड़ों के दर्द का इलाज
एक उम्र के बाद जोड़ो में दर्द होना अकसर सामान्य मान लिया जाता है। लेकिन समस्या तब गंभीर हो जाती है जब कम उम्र में यह सताने लगे या यह लंबे समय तक परेशान करे। जोड़ो का दर्द दवा खाने पर तो कम हो जाता है लेकिन कुछ देर बाद फिर शुरू हो जाता है। अगर आप या आपका कोई करीबी इस समस्या से परेशान है तो हम आपके लिए लाए हैं जोड़ो के दर्द को दूर करने के कुछ आसान और घरेलू उपाय। Keva Joints Care Drops 

जोड़ो के दर्द का देसी इलाज: लहसुन का सेवन और लहसुन के तेल से मालिश
लहसून में ऐसे तत्व होते जिनके कारण सूजन और दर्द से आराम मिलता है। ऐसे में हर दिन कम से कम पांच साबूत कलिया लहसुन की खानी चाहिए। आप चाहे तो लहसून को हल्का सा आग पर सेंक कर या बिना सेकें भी खा सकते हैं। इसके अलावा सरसों के तेल में लहसून की कलियों को पकाकर उस तेल से मालिश करने से भी जोड़ों के दर्द से हमेशा के लिए आराम मिलता है। यह नुस्खा जोड़ो को मजबूत भी बनाता है।


अदरक करें जोड़ो के दर्द को दूर
अदरक का सेवन भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। सर्दियों में जितना हो सके अदरक वाली चाय पिएं और अदरक का हलवा खाएं। अब आपको अदरक से बनने वाले एक तेल के बारे में भी बताते हैं। थोड़ी सी काली उड़द, अदरक और कपूर को सरसों के तेल पांच मिनट तक पकाएं। फिर इसे छान कर तेल अलग कर लें और इस तेल को हर दिन हल्का गर्म कर मालिश करें। दिन में दो से तीन बार इस तेल से मालिश करने से आपके जोड़ो का दर्द जल्दी ही खात्म हो जाएगा।

विटामिन ई से युक्त चीजें खाएं
विटामिन ई जोड़ो के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे सूजन नहीं होती और हड्डियों में लचीलापन बना रहता है। बादाम, मछली, मूंगफली आदि में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

हल्दी वाला दूध
हल्दी अपने चमत्कारी औषधीय गुणों के कारण प्रसिद्ध है। हल्दी वाला दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती है और जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है।

सेब का सिरका
सेब का सिरका भी जोड़ो के दर्द से आराम दिलाता है। हर दिन एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पिएँ और जोड़ो के दर्द को दूर भगाइए।

गर्म पानी से सेंक
गर्म पानी से सेंक करने से जोड़ो के दर्द से तुरंत आराम मिलता है। जोड़ो के दर्द के रोगियों को प्रतिदिन कुछ समय गुनगुने पानी से सेंक करनी चाहिए और मालिश भी गुनगुने तेल से ही करनी चाहिए। बेहतर होगा अगर वह नहाने के लिए भी गुनगुने पानी का ही प्रयोग करें।

तेल
जोड़ो के दर्द में अरंडी, महानारायण, सैन्धवाधि अथवा रूमताज तेल काफी फायदेमंद होता है। याद रखें कि मालिश हमेशा गुनगुने तेल से ही करें। इसके अलावा जोड़ों के दर्द के रोगियों को प्रतिदिन पांच से छह लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए। आशा है यह देसी इलाज आपके लिए कारगर सिद्ध होंगे।

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